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Friday, 23 November 2007

खबर किसकी????????

आजकल यह ट्रेंड तेजी से देखा जा रहा है कि एक चैनल किसी फुटेज को एक्सक्लूसिव बता कर प्रसारित करता है और उसके चंद मिनटों बाद वही फुटेज एक नये कलेवर के साथ दूसरे चैनल की एक्सक्लूसिव खबर बन जाती है? क्या इस दिशा में कॉपीराइट कानून कुछ नहीं कहता.
ताजा-तरीन मामला डी-कंपनी के विडियो का है. सबसे तेज चैनल ने रात आठ बजे इस वीडियो क्लिप को आधार बना कर एक विशेष कार्यक्रम का प्रसारण शुरु किया. उसका चिर-प्रतिद्वंदी भला कैसे पीछे रह सकता था. बमुश्किल आधा घंटा हुआ था कि नयी साज-सज्जा के साथ वही विडियो क्लिपिंग दूसरे चैनल पर ब्रेकिंग न्यूज के रूप में मौजूद था. लब्बो-लुआब यह कि हम कर रहे हैं यह सनसनीखेज खुलासा. भले ही यह खबर घंटो पहले दिखायी जा चुकी हो.
कहानी नयी नहीं है. विधी -व्यवस्था से जुडी तमाम खबरों पर ध्यान देते ही स्पष्ट हो जाता है कि एक क्लिप किस तरह हर चैनल पर घूमती है. भागलपुर में पुलिसकर्मी और भीड द्वारा एक युवक की बर्बरता से हुई पिटाई की खबर भी इसका उदाहरण है. इस घटना की फुटेज सबसे पहले वहां के स्थानीय चैनल पीटीएन ने ली थी लेकिन लगभग हर चैनल यह दावा करता रहा कि सबसे तस्वीर उसने ली. हद तो तब हो गयी जब घटना के एक दिन बाद भी एक चैनल उस फुटेज कोप लाइव कह कर प्रसारित करता रहा.
वर्षों पहले गुडगांवा के होंडा फैक्ट्री में हुए लाठीचार्ज में भी कुछ ऐसी हालत बनी थी. तब चैनलों की दाल इसलिए नहीं गली कि तस्वीर लेने वाला शख्स खुद एक स्वतंत्र पत्रकार था.
एक क्लिप को हासिल करना और उसे अपनी लोकप्रियता के लिए भुनाना बुरा नहीं है लेकिन क्या हम जरा भी ईमानदारी नहीं दिखा सकते हैं. कई बार 'एक चैनल की खबर के अनुसार' जैसे जुमलों का प्रयोग दर्शकों को भ्रमित होने से बचाता है. टीवी चैनलों पर इस सतर्कता का भी अभाव दिख रहा है.

Thursday, 25 October 2007

ब्रेकिंग न्यूज : पत्रकार पिटे

वीरवार की शाम आईबीएन 7 पर यही ब्रेकिंग न्यूज थी। एक चैनल पर खबर चली क्या यह पूरी मीडिया के लिए ब्रेकिंग न्यूज बन गयी। हालांकि चैनल ने खबर को इस तरह दिखाया था : "लुधियाना में पहलवान भिडे।" पहली नजर में मैंने भी सोचा पहलवानों का भिड़ना नयी बात नहीं। लेकिन पूरी कहानी देखने के बाद पता चला कि पहलवान किसी और से नही पत्रकारों से भिडे थे।
यह खबर ब्रेकिंग न्यूज इसीलिए बनी कि मामला ऐसा है कि उस शाम लुधियाना में कुछ पहलवान प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे। दो एक दिन बात वहाँ कुश्ती प्रतियोगिता होनी थी। तभी खबर आयी कि प्रतियोगिता रद्द हो गयी है। तभी किसी बात पर एक पत्रकार को हँसी आ गयी. यह हँसी पहलवान को चिढा गयी और दंगल शुअरू हो गया.
सवाल है कि अगर पत्रकारों से पहलवानों की लड़ाई हुई भी तो क्या यह इतनी बड़ी बात है जो पूरे देश के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो। इतनी कि ब्रेकिंग न्यूज बन जाए। आख़िर ब्रेकिंग न्यूज का मतलब क्या है? यह घटना उस स्थान विशेष पर बड़ी बात हो सकती है। पर राष्ट्रीय चैनलों के लिए यह कैसे ब्रेकिंग न्यूज हो सकती है?
ठीक इसी समय दूसरे चैनल पर चल रहे ब्रेकिंग न्यूज पर नजर डालते हैं। आज तक की ब्रेकिंग न्यूज थी : मैडम तुशाद म्यूजियम में लगेगी सलमान की मूर्ति, सर्वेक्षण में सलमान और ऐश्वर्या से आगे निकले।
क्या यह खबर भी ब्रेकिंग न्यूज बनने लायक थी? कितना बड़ा जनसमुदाय इससे प्रभावित हो रहा था?
आज चैनलो के रवैये से बस इतना ही कहा जा सकता है कि टेलीविजन की टर्मिनोलोजी के लिए नए शब्दकोष का इस्तेमाल करना पडेगा.