वीरवार की शाम आईबीएन 7 पर यही ब्रेकिंग न्यूज थी। एक चैनल पर खबर चली क्या यह पूरी मीडिया के लिए ब्रेकिंग न्यूज बन गयी। हालांकि चैनल ने खबर को इस तरह दिखाया था : "लुधियाना में पहलवान भिडे।" पहली नजर में मैंने भी सोचा पहलवानों का भिड़ना नयी बात नहीं। लेकिन पूरी कहानी देखने के बाद पता चला कि पहलवान किसी और से नही पत्रकारों से भिडे थे।
यह खबर ब्रेकिंग न्यूज इसीलिए बनी कि मामला ऐसा है कि उस शाम लुधियाना में कुछ पहलवान प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे। दो एक दिन बात वहाँ कुश्ती प्रतियोगिता होनी थी। तभी खबर आयी कि प्रतियोगिता रद्द हो गयी है। तभी किसी बात पर एक पत्रकार को हँसी आ गयी. यह हँसी पहलवान को चिढा गयी और दंगल शुअरू हो गया.
सवाल है कि अगर पत्रकारों से पहलवानों की लड़ाई हुई भी तो क्या यह इतनी बड़ी बात है जो पूरे देश के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो। इतनी कि ब्रेकिंग न्यूज बन जाए। आख़िर ब्रेकिंग न्यूज का मतलब क्या है? यह घटना उस स्थान विशेष पर बड़ी बात हो सकती है। पर राष्ट्रीय चैनलों के लिए यह कैसे ब्रेकिंग न्यूज हो सकती है?
ठीक इसी समय दूसरे चैनल पर चल रहे ब्रेकिंग न्यूज पर नजर डालते हैं। आज तक की ब्रेकिंग न्यूज थी : मैडम तुशाद म्यूजियम में लगेगी सलमान की मूर्ति, सर्वेक्षण में सलमान और ऐश्वर्या से आगे निकले।
क्या यह खबर भी ब्रेकिंग न्यूज बनने लायक थी? कितना बड़ा जनसमुदाय इससे प्रभावित हो रहा था?
आज चैनलो के रवैये से बस इतना ही कहा जा सकता है कि टेलीविजन की टर्मिनोलोजी के लिए नए शब्दकोष का इस्तेमाल करना पडेगा.
Thursday, 25 October 2007
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